
दिल्ली की सियासत पर पूरा देश शर्मिंदा है
भारत मुर्दाबाद कहने वाला, अब तक कैसे जिंदा है
चंद शिखन्दी आज यहां, शेरों का सिर काट ले जा रहे
और खादीधारी जयचंद यहां, गीत निंदा की गा रहे
अब ना रामनवमी की बात होगी,
ना रमजान का बहाना होगा
जिन माँ ने दिया अपना जिगर का टुकड़ा, वतन की रखवाली को
उनका बेटा, उन्हें जिंदा हीं लौटाना होगा
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